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      सुचना का अधिकार अधिनियम 22/2005, भारत के राजपत्र असाधारण भाग-2 खण्ड-1, जुन 21,2005 विधि एवं न्याय मंत्रालय, पृष्ठ 1, लगायत 22 पर प्रकाशित हुआ है।

       इस अधिनियम का मूल मन्तव्य यह है कि लोकतांत्रिक शासन में सरकार और सरकारी मशीनरी जनता के प्राति जवाबदेह हो तथा सरकारी मशीनरी के क्रियाकमापों में पारदर्शिता हो। इस अधिनियम के माध्यम से ऐसी व्यवस्था की गई है जिसके अंतर्गत कोई भी नागरिक लोक प्राधिकारी के कार्यकलापों के संबंधं में सूचना प्राप्त कर सके। लोक प्राधिकारी की परिभाषा इस प्रकार की है जिससे न केवल प्रशासनिक तंत्र के संबंधं में कोई भी नागरिक जानकारी प्राप्त कर सकता है बल्कि उन सभी निकायों के संबंधं में जानकारी प्राप्त कर सकता है जो लोक प्राधिकारी से नियंत्रित होतो हैं या अधिक मात्रा में वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं। More>>

      सुचना का अधिकार अधिनियम 22/2005, भारत के राजपत्र असाधारण भाग-2 खण्ड-1, जुन 21,2005 विधि एवं न्याय मंत्रालय, पृष्ठ 1, लगायत 22 पर प्रकाशित हुआ है।

       इस अधिनियम का मूल मन्तव्य यह है कि लोकतांत्रिक शासन में सरकार और सरकारी मशीनरी जनता के प्राति जवाबदेह हो तथा सरकारी मशीनरी के क्रियाकमापों में पारदर्शिता हो। इस अधिनियम के माध्यम से ऐसी व्यवस्था की गई है जिसके अंतर्गत कोई भी नागरिक लोक प्राधिकारी के कार्यकलापों के संबंधं में सूचना प्राप्त कर सके। लोक प्राधिकारी की परिभाषा इस प्रकार की है जिससे न केवल प्रशासनिक तंत्र के संबंधं में कोई भी नागरिक जानकारी प्राप्त कर सकता है बल्कि उन सभी निकायों के संबंधं में जानकारी प्राप्त कर सकता है जो लोक प्राधिकारी से नियंत्रित होतो हैं या अधिक मात्रा में वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं। अधिनियम में यह व्यवस्था की गई है कि यदि लोक सूचना अधिकारी व्दारा संबंधित को समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो ऐसे अधिकारियों को, राज्य सरकार व्दारा गठित राज्य सूचना आयोग व्दारा दण्डित किया जा सकता है। सूचना का अधिकार अधिनियम जम्मू एवं कश्मीर राज्य को छोडकर सम्पूर्ण भारत में दिनांक 12 अक्टूबर 2005 से लागू किया गया है।

      मध्यप्रदेश सरकार व्दारा सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 15 के अनुसार राज्य सूचना आयोग का गठन, अधिसूचना क्रं./एफ-11/11/05/1/9 दिनांक 22 अगस्त, 2005 व्दारा किया गयौक है।

      राज्य सूचना आयोग की विशेष बात यह है कि यह आयोग वैधानिक प्रावधानों व्दारा स्थापित होने के कारण कार्य्पालिका एवं न्यायपालिका के प्रभाव से पूर्णत: मुक्त है।                                                    Less<<

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राज्य सूचना आयोग की विशेष बात यह है कि यह आयोग वैधानिक प्रावधानों व्दारा स्थापित होने के कारण कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के प्रभाव से पूर्णत: मुक्त है।

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Last Updated on: 11-05-2018
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